Live Air Quality Index
发布时间:2026-09-13 | 浏览:2
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सबसे लोकप्रिय शहरों में AQI
सर्वाधिक प्रदूषित शहर
सबसे कम प्रदूषित शहर
वायु गुणवत्ता सूचकांक पैमाना
51-100 AQI Moderate
101-150 AQI Poor
151-200 AQI Unhealthy
201-300 AQI severe
301-500+ AQI Hazardous
आज नई दिल्ली का AQI क्या है
नई दिल्ली में AQI 121 तक पहुंच गया, जो (Poor) वायु गुणवत्ता की स्थिति को दर्शाता है, जिसका मुख्य कारण PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों में वृद्धि है।
कल नई दिल्ली का AQI क्या था?
शनिवार 12 सितंबर को, नई दिल्ली में AQI 167 तक पहुंच गया, जो (Unhealthy) वायु गुणवत्ता की स्थिति को दर्शाता है, जिसका मुख्य कारण PM2.5 और PM10 जैसे प्रदूषकों में वृद्धि है।
ख़राब हवा कैसे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है?
ख़राब हवा स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालती है, खासकर जब हवा में पीएम2.5, पीएम10, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, और ओजोन जैसे हानिकारक तत्व मौजूद हों.
श्वसन तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे फेफड़ों में जलन, खांसी, और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है. दमा (अस्थमा) और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) हो सकती है. हानिकारक कण रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे दिल का दौरा, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.
लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है. प्रदूषण में मौजूद जहरीले कण मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और अवसाद हो सकता है. कुछ शोधों के अनुसार, यह स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है.
गर्भवती महिलाओं में ख़राब हवा से गर्भस्थ शिशु के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. बच्चों में फेफड़ों का विकास धीमा हो सकता है और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. प्रदूषित हवा त्वचा में जलन, खुजली और एलर्जी का कारण बन सकती है. आंखों में जलन, लालिमा और पानी आना आम समस्या है.
लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. ख़राब हवा का स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव गंभीर हो सकता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता और जीवन प्रत्याशा कम हो सकती है. इससे बचाव के लिए मास्क पहनना, इनडोर एयर प्यूरीफायर का उपयोग, और प्रदूषण से बचने के उपाय करना आवश्यक है.
ख़राब हवा के होने पर क्या करना चाहिये?
अत्यधिक प्रदूषण के समय (खासतौर पर सुबह और देर शाम) बाहर जाने से बचें. यदि बाहर जाना ज़रूरी हो, तो N95 या P100 जैसे गुणवत्ता वाले मास्क पहनें. इनडोर रहकर व्यायाम करें और बाहरी गतिविधियों से बचें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को. खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें ताकि प्रदूषित हवा अंदर न आ सके. घर और ऑफिस में एयर प्यूरीफायर लगाएं, खासकर सोने और काम करने वाली जगहों पर. एयर प्यूरीफायर खरीदते समय HEPA फिल्टर वाले उपकरण को प्राथमिकता दें. अगर सांस लेने में परेशानी हो, खांसी या छाती में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. अधिक पानी पिएं और आहार में एंटीऑक्सिडेंट्स युक्त फल और सब्जियां शामिल करें, जैसे अमरूद, संतरा और पालक.
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) चेक करने के लिए ऐप्स या वेबसाइट्स का उपयोग करें और उसी के अनुसार अपनी दिनचर्या बनाएं. घर में धूल और प्रदूषण को कम करने के लिए नियमित सफाई करें. इनडोर पौधों जैसे स्नेक प्लांट और पीस लिली का उपयोग करें, जो हवा को शुद्ध करने में मदद करते हैं. कारपूलिंग करें, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें, या इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दें. बाहर से आने के बाद चेहरा, हाथ और नाक को अच्छे से धोएं. मास्क और कपड़ों की सफाई नियमित करें.
PM 2.5 और PM10 लेवल में क्या अंतर है.?
PM 2.5 और PM 10 हवा में मौजूद कणीय पदार्थ (Particulate Matter) हैं, जो प्रदूषण के प्रमुख घटक हैं। इनका अंतर मुख्य रूप से आकार, स्रोत, और स्वास्थ्य पर प्रभाव में है. PM 10 का व्यास 10 माइक्रोन या उससे कम होता है, जबकि PM 2.5 का व्यास 2.5 माइक्रोन या उससे छोटा होता है, जो PM 10 से अधिक महीन और खतरनाक है.
स्रोतों की बात करें तो, PM 10 सड़क की धूल, निर्माण कार्य, और परागकण से निकलता है, जबकि PM 2.5 वाहनों के धुएं, पराली जलाने, और औद्योगिक उत्सर्जन से उत्पन्न होता है. स्वास्थ्य पर प्रभाव में, PM 10 नाक और गले को प्रभावित करता है, जबकि PM 2.5 फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर गंभीर बीमारियां, जैसे दिल और फेफड़ों की समस्याएं, पैदा करता है.
PM 2.5 हवा में अधिक समय तक निलंबित रहता है और स्मॉग बनाने में प्रमुख भूमिका निभाता है, जिससे इसका स्वास्थ्य पर प्रभाव अधिक होता है.