वयं वर्णमालां पठामः
发布时间:2026-09-19 | 浏览:2
वयं वर्णमालां पठामः | Class 6 NCERT Sanskrit Deepakam Chapter 1 Explanation in HIndi and English
परिचय – वयं वर्णमालां पठामः (कक्षा 6 संस्कृत)
"वयं वर्णमालां पठामः" कक्षा 6 की NCERT Sanskrit Book दीपकम् का प्रथम अध्याय है। इस अध्याय में विद्यार्थियों को संस्कृत वर्णमाला का व्यवस्थित परिचय कराया गया है। इसमें स्वर, व्यंजन, अनुनासिक स्वर, स्पर्श, अन्तःस्थ, ऊष्म तथा अयोगवाह वर्णों का सरल एवं रोचक ढंग से अध्ययन कराया गया है। इसके साथ ही गुणिताक्षरों का निर्माण, वर्णों के उच्चारण-स्थान, संधि के प्रारम्भिक उदाहरण तथा सही उच्चारण का महत्व भी समझाया गया है। अभ्यास प्रश्नों और चित्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को वर्णों की पहचान, लेखन तथा उच्चारण का अभ्यास कराया जाता है। यह अध्याय संस्कृत भाषा सीखने की मजबूत नींव तैयार करता है और आगे आने वाले सभी पाठों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि विद्यार्थी इस अध्याय को अच्छी तरह समझ लेते हैं, तो संस्कृत पढ़ना, लिखना और शुद्ध उच्चारण करना उनके लिए बहुत सरल हो जाता है।
Introduction – Vayaṁ Varṇamālāṁ Paṭhāmaḥ
"Vayaṁ Varṇamālāṁ Paṭhāmaḥ" is the first chapter of the NCERT Sanskrit Deepakam Class 6 textbook. This chapter introduces students to the Sanskrit alphabet in a systematic and easy-to-understand manner. It explains vowels, consonants, nasal vowels, stop consonants (varga letters), semi-vowels, sibilants, and Ayogavāha letters.The chapter also teaches the formation of combined letters (Guṇitākṣaras), the places of pronunciation of different letters, basic examples of Sandhi, and the importance of correct pronunciation. Through illustrations and practice exercises, students learn to identify, read, write, and pronounce Sanskrit letters accurately.This chapter lays a strong foundation for learning Sanskrit and is essential for understanding the lessons that follow. Once students master the concepts presented here, reading, writing, and pronouncing Sanskrit correctly becomes much easier.
संस्कृत शब्दार्थ
वर्णाः द्विविधाः भवन्ति – स्वराः व्यञ्जनानि च।
वर्ण दो प्रकार के होते हैं— स्वर और व्यंजन ।
Letters are of two types— vowels and consonants .
(१) स्वराः ( स्वर)
स्वराणाम् उच्चारणं स्वतन्त्ररूपेण भवति। स्वरों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता है। Vowels are pronounced independently. ( without the help of any other letter.) स्वराः द्विविधाः सन्ति— समानाक्षराणि सन्ध्यक्षराणि च। स्वर दो प्रकार के होते हैं— समानाक्षर और सन्ध्यक्षर। Vowels are of two types— Simple Vowels and Compound (Sandhi) Vowels . १. समानाक्षराणि वर्णमालायाम् आदौ ये सामान्या: स्वराः सन्ति, ते समानाक्षर-स्वराः भवन्ति। वर्णमाला के प्रारम्भ में जो सामान्य स्वर होते हैं, वे समानाक्षर स्वर कहलाते हैं। The ordinary vowels that appear at the beginning of the alphabet are called simple vowels (Samānākṣara Vowels) . अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ
स्वराः द्विविधाः सन्ति— समानाक्षराणि सन्ध्यक्षराणि च। स्वर दो प्रकार के होते हैं— समानाक्षर और सन्ध्यक्षर।
Vowels are of two types— Simple Vowels and Compound (Sandhi) Vowels .
१. समानाक्षराणि
वर्णमालायाम् आदौ ये सामान्या: स्वराः सन्ति, ते समानाक्षर-स्वराः भवन्ति। वर्णमाला के प्रारम्भ में जो सामान्य स्वर होते हैं, वे समानाक्षर स्वर कहलाते हैं।
The ordinary vowels that appear at the beginning of the alphabet are called simple vowels (Samānākṣara Vowels) .
अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ
आ, ई, ऊ, ॠ, ए, ऐ, ओ, औ २. सन्ध्यक्षराणि
आ, ई, ऊ, ॠ, ए, ऐ, ओ, औ
२. सन्ध्यक्षराणि
द्वयोः निश्चित-स्वरयोः सन्धिद्वारा ये नवीनाः स्वरवर्णाः जायन्ते, ते सन्ध्यक्षर-स्वराः भवन्ति। दो निश्चित स्वरों की सन्धि से जो नए स्वर-वर्ण उत्पन्न होते हैं, वे सन्ध्यक्षर स्वर कहलाते हैं। The new vowels that are formed by the combination (Sandhi) of two specific vowels are called compound vowels (Sandhyakṣara vowels) .
द्वयोः निश्चित-स्वरयोः सन्धिद्वारा ये नवीनाः स्वरवर्णाः जायन्ते, ते सन्ध्यक्षर-स्वराः भवन्ति। दो निश्चित स्वरों की सन्धि से जो नए स्वर-वर्ण उत्पन्न होते हैं, वे सन्ध्यक्षर स्वर कहलाते हैं।
The new vowels that are formed by the combination (Sandhi) of two specific vowels are called compound vowels (Sandhyakṣara vowels) .
स्वर सन्धि नया स्वर अ + इ ए अ + उ ओ अ + ए ऐ अ + ओ औ
अनुनासिक-स्वरा:
मुखेन सह नासिकया अपि उच्चारिता: स्वरा: अनुनासिक-स्वरा: भवन्ति -
जो स्वर मुख के साथ-साथ नाक से भी उच्चारित किए जाते हैं, उन्हें अनुनासिक स्वर कहते हैं। The vowels that are pronounced through both the mouth and the nose are called nasal vowels (Anunāsika vowels). अँ, आँ, इँ, ईँ, उँ, ऊँ, ऋँ, ॠँ, ऌँ, एँ, ऐँ, ओँ, औँ।
जो स्वर मुख के साथ-साथ नाक से भी उच्चारित किए जाते हैं, उन्हें अनुनासिक स्वर कहते हैं।
The vowels that are pronounced through both the mouth and the nose are called nasal vowels (Anunāsika vowels).
अँ, आँ, इँ, ईँ, उँ, ऊँ, ऋँ, ॠँ, ऌँ, एँ, ऐँ, ओँ, औँ।
( प्रत्येक स्वर की एक विशिष्ट उच्चारण होती है और यह संस्कृत में शब्दों और मंत्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं। ये स्वर भाषा में मूलभूत ध्वनियाँ बनाते हैं)
( प्रत्येक स्वर की एक विशिष्ट उच्चारण होती है और यह संस्कृत में शब्दों और मंत्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं। ये स्वर भाषा में मूलभूत ध्वनियाँ बनाते हैं)
२. व्यञ्जन (व्यंजन)
व्यञ्जनानाम् उच्चारणे कस्यचित् स्वरस्य सहायताया: अपेक्षा अवश्यं भवति। अत: वर्णमालायां व्यञ्जनानाम् उच्चारणार्थं सर्वत्र (अ) स्वरस्य योजनं भवति।
व्यंजनों के उच्चारण के लिए किसी न किसी स्वर की सहायता आवश्यक होती है। इसी कारण वर्णमाला में व्यंजनों के उच्चारण के लिए प्रत्येक व्यंजन के साथ 'अ' स्वर जोड़ा जाता है। The pronunciation of consonants necessarily requires the help of a vowel. Therefore, in the Sanskrit alphabet, the vowel 'अ' is added to every consonant to make its pronunciation possible. उदाहरण— क् + अ = क ख् + अ = ख ग् + अ = ग घ् + अ = घ
व्यंजनों के उच्चारण के लिए किसी न किसी स्वर की सहायता आवश्यक होती है। इसी कारण वर्णमाला में व्यंजनों के उच्चारण के लिए प्रत्येक व्यंजन के साथ 'अ' स्वर जोड़ा जाता है।
The pronunciation of consonants necessarily requires the help of a vowel. Therefore, in the Sanskrit alphabet, the vowel 'अ' is added to every consonant to make its pronunciation possible.
अत्र व्यञ्जनं केवलं क् ख् ग् घ् इत्येव अस्ति ।
यहाँ वास्तविक व्यंजन केवल क्, ख्, ग्, घ् हैं।
अत्र (अ) स्वर: केवलम् उच्चारणार्थं योजित: अस्ति।
'अ' स्वर केवल उच्चारण को सरल बनाने के लिए जोड़ा गया है। Here, the vowel 'अ' has been added only for the purpose of pronunciation . व्यञ्जानानां चत्वार: भेदा: सन्ति -
'अ' स्वर केवल उच्चारण को सरल बनाने के लिए जोड़ा गया है।
Here, the vowel 'अ' has been added only for the purpose of pronunciation .
स्पर्शा: वर्णा: - स्पर्श (वर्गीय) व्यंजन अन्त: स्था: वर्णा: - अन्तःस्थ व्यंजन ऊष्म-वर्णा: - ऊष्म व्यंजन अयोगवाहौ वर्णौ - अयोगवाह
स्पर्शा: वर्णा: - स्पर्श (वर्गीय) व्यंजन
अन्त: स्था: वर्णा: - अन्तःस्थ व्यंजन
ऊष्म-वर्णा: - ऊष्म व्यंजन
अयोगवाहौ वर्णौ - अयोगवाह
१. स्पर्शा: (वर्ग्या:) वर्णा: - स्पर्श (वर्गीय) वर्ण
स्पर्शा: (वर्ग्या:) व्यञ्जनवर्णा: स्वकीय-उच्चारण-स्थानानुसारेण पञ्चसु वर्गेषु विभक्ता: भवन्ति। स्पर्श व्यंजन अपने-अपने उच्चारण स्थान के अनुसार पाँच वर्गों में विभाजित किए गए हैं— Sparsha (Varga) consonants are divided into five groups according to their place of pronunciation). क वर्ग: क ख ग घ ङ च वर्ग: च छ ज झ ञ ट वर्ग: ट ठ ड ढ ण त वर्ग: त थ द ध न प वर्ग: प फ ब भ म
स्पर्शा: (वर्ग्या:) व्यञ्जनवर्णा: स्वकीय-उच्चारण-स्थानानुसारेण पञ्चसु
वर्गेषु विभक्ता: भवन्ति।
स्पर्श व्यंजन अपने-अपने उच्चारण स्थान के अनुसार पाँच वर्गों में विभाजित किए गए हैं—
Sparsha (Varga) consonants are divided into five groups according to their place of pronunciation).
२. अन्त:स्था: वर्णा: - अन्तःस्थ वर्ण
अन्त:स्था: वर्णा: बहुत्र स्वर-वर्णानां स्थाने जायन्ते। अत: एते - अर्ध-स्वरा: इत्यपि उच्यन्ते।
अन्तःस्थ वर्ण अनेक स्थानों पर स्वर वर्णों के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं। इस कारण इन्हें अर्धस्वर (Semi-vowels) भी कहा जाता है।
Semi-vowels are used in many places in place of vowels. Therefore, they are also known as half-vowels (Semi-vowels).
इ + अ = य् + अ यथा - यदि + अपि = यद्यपि
ऋ + अ = र् + अ पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
लृ + अ = ल् + अ लृ + आकृति: = लाकृति:
उ + अ = व् + अ सु + आगतम् = स्वागतम्
३. ऊष्म-वर्णा: - ऊष्म वर्ण
ऊष्मणां व्यञ्जन-वर्णानाम् उच्चारण-समये मुखात् उष्णः वायुः निस्सरति।
ऊष्म व्यंजनों का उच्चारण करते समय मुख से गर्म (उष्ण) वायु निकलती है।
While pronouncing Uṣma (sibilant) consonants , warm air comes out of the mouth.
४. अयोगवाहौ वर्णौ - अयोगवाह व्यंजन
अयोगवाहः विशिष्टः व्यञ्जन-वर्णः अस्ति। अत्र उच्चारणार्थम् 'अ' स्वरस्य संयोजनं पूर्वं भवति, न तु पश्चात्। अत्र द्वौ अयोगवाहौ स्तः।
अयोगवाह एक विशेष प्रकार का व्यंजन-वर्ण है। इसके उच्चारण के लिए 'अ' स्वर पहले जोड़ा जाता है, बाद में नहीं। अयोगवाह दो हैं—
Ayogavāha is a special type of consonant symbol . For its pronunciation, the vowel 'अ' is added before it, not after it. There are two Ayogavāha letters :
अं = अ + ं अनुस्वार:
अ: = अ + : विसर्ग:
अत्रापि अनुस्वारः केवलं ं, तथा विसर्गः केवलं ः इत्येव अस्ति।
यहाँ भी अनुस्वार केवल "ं" ही है तथा विसर्ग केवल "ः" ही है।
Here also, the Anusvāra is only "ं" , and the Visarga is only "ः" .
एवमेव अत्रापि पूर्वं योजितः (अ) स्वरः केवलम् उच्चारणार्थम् अस्ति। इसी प्रकार यहाँ भी पहले जोड़ा गया 'अ' स्वर केवल उच्चारण की सुविधा के लिए है। Similarly, here too, the vowel 'अ' added before the symbol is only to make pronunciation possible . व्यञ्जनैः सह सर्वेषाम् अपि स्वराणां संयोजनं भवति। सभी स्वरों का व्यंजनों के साथ संयोजन होता है। All the vowels are combined with consonants. व्यञ्जनैः सह स्वराणां संयोजनेन गुणिताक्षराणि भवन्ति। व्यंजनों के साथ स्वरों के मेल से गुणिताक्षर (मात्रायुक्त अक्षर) बनते हैं। The combination of vowels with consonants forms combined (vowel-marked) letters , known as Guṇitākṣaras .
एवमेव अत्रापि पूर्वं योजितः (अ) स्वरः केवलम् उच्चारणार्थम् अस्ति।
इसी प्रकार यहाँ भी पहले जोड़ा गया 'अ' स्वर केवल उच्चारण की सुविधा के लिए है।
Similarly, here too, the vowel 'अ' added before the symbol is only to make pronunciation possible .
व्यञ्जनैः सह सर्वेषाम् अपि स्वराणां संयोजनं भवति।
सभी स्वरों का व्यंजनों के साथ संयोजन होता है।
All the vowels are combined with consonants.
व्यञ्जनैः सह स्वराणां संयोजनेन गुणिताक्षराणि भवन्ति।
व्यंजनों के साथ स्वरों के मेल से गुणिताक्षर (मात्रायुक्त अक्षर) बनते हैं।
The combination of vowels with consonants forms combined (vowel-marked) letters , known as Guṇitākṣaras .
उदाहरण (Example): क् + अ = क क् + आ = का क् + इ = कि क् + ई = की क् + उ = कु क् + ए = के इन सभी को गुणिताक्षर (Combined Letters) कहा जाता है। स्वर एवं मात्राएँ अ — आ ा इ ि ई ी उ ु ऊ ू ऋ ृ ॠ ॄ ऌ ॢ ॡ ॣ ए े ऐ ै ओ ो औ ौ गुणिताक्षराणि - गुणिताक्षर (मात्रायुक्त अक्षर) क का कि की कु कू कृ कॄ कॢ कॣ के कै को कौ ख खा खि खी खु खू खृ खॄ खॢ खॣ खे खै खो खौ ग गा गि गी गु गू गृ गॄ गॢ गॣ गे गै गो गौ घ घा घि घी घु घू घृ घॄ घॢ घॣ घे घै घो घौ च चा चि ची चु चू चृ चॄ चॢ चॣ चे चै चो चौ छ छा छि छी छु छू छृ छॄ छॢ छॣ छे छै छो छौ ज जा जि जी जु जू जृ जॄ जॢ जॣ जे जै जो जौ झ झा झि झी झु झू झृ झॄ झॢ झॣ झे झै झो झौ ट टा टि टी टु टू टृ टॄ टॢ टॣ टे टै टो टौ ठ ठा ठि ठी ठु ठू ठृ ठॄ ठॢ ठॣ ठे ठै ठो ठौ ड डा डि डी डु डू डृ डॄ डॢ डॣ डे डै डो डौ ढ ढा ढि ढी ढु ढू ढृ ढॄ ढॢ ढॣ ढे ढै ढो ढौ त ता ति ती तु तू तृ तॄ तॢ तॣ ते तै तो तौ थ था थि थी थु थू थृ थॄ थॢ थॣ थे थै थो थौ द दा दि दी दु दू दृ दॄ दॢ दॣ दे दै दो दौ ध धा धि धी धु धू धृ धॄ धॢ धॣ धे धै धो धौ न ना नि नी नु नू नृ नॄ नॢ नॣ ने नै नो नौ प पा पि पी पु पू पृ पॄ पॢ पॣ पे पै पो पौ फ फा फि फी फु फू फृ फॄ फॢ फॣ फे फै फो फौ ब बा बि बी बु बू बृ बॄ बॢ बॣ बे बै बो बौ भ भा भि भी भु भू भृ भॄ भॢ भॣ भे भै भो भौ म मा मि मी मु मू मृ मॄ मॢ मॣ मे मै मो मौ य या यि यी यु यू यृ यॄ यॢ यॣ ये यै यो यौ र रा रि री रु रू रृ रॄ रॢ रॣ रे रै रो रौ ल ला लि ली लु लू लृ लॄ लॢ लॣ ले लै लो लौ व वा वि वी वु वू वृ वॄ वॢ वॣ वे वै वो वौ श शा शि शी शु शू शृ शॄ शॢ शॣ शे शै शो शौ ष षा षि षी षु षू षृ षॄ षॢ षॣ षे षै षो षौ स सा सि सी सु सू सृ सॄ सॢ सॣ से सै सो सौ ह हा हि ही हु हू हृ हॄ हॢ हॣ हे है हो हौ प्रश्न उत्तर (Question Answers) प्र 1. “वयं वर्णमालां पठामः” का क्या अर्थ है? उत्तर: हम वर्णमाला पढ़ते हैं। प्र 2. स्वर क्या होते हैं? उत्तर: जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी सहायता के होता है, उन्हें स्वर कहते हैं। प्र 3. संस्कृत में कितने प्रकार के वर्ण होते हैं? उत्तर: दो प्रकार — स्वर और व्यञ्जन। प्र 4. संस्कृत में स्वर कितने प्रकार के होते हैं? उत्तर: दो प्रकार — समानाक्षराणि और सन्ध्यक्षराणि। प्र 5. व्यञ्जन के कितने भेद होते हैं? उत्तर: व्यञ्जन के चार भेद होते हैं। स्पर्शा: वर्णा: अन्त: स्था: वर्णा: ऊष्म-वर्णा: अयोगवाहौ वर्णौ प्र 6. स्पर्श व्यंजन वर्णों को उनके उच्चारण स्थानों के आधार पर कितने वर्गों में विभाजित किया गया है? उत्तर: स्पर्श व्यंजन वर्णों को उनके उच्चारण स्थानों के आधार पर पाँच वर्गों में विभाजित किया गया है। क वर्ग: च वर्ग: ट वर्ग: त वर्ग: प वर्ग:
उदाहरण (Example): क् + अ = क क् + आ = का क् + इ = कि क् + ई = की क् + उ = कु क् + ए = के इन सभी को गुणिताक्षर (Combined Letters) कहा जाता है।
उदाहरण (Example):
इन सभी को गुणिताक्षर (Combined Letters) कहा जाता है।
स्वर एवं मात्राएँ
गुणिताक्षराणि - गुणिताक्षर (मात्रायुक्त अक्षर)
प्रश्न उत्तर (Question Answers)
प्र 1. “वयं वर्णमालां पठामः” का क्या अर्थ है?
प्र 2. स्वर क्या होते हैं?
प्र 3. संस्कृत में कितने प्रकार के वर्ण होते हैं?
प्र 4. संस्कृत में स्वर कितने प्रकार के होते हैं?
प्र 5. व्यञ्जन के कितने भेद होते हैं?
स्पर्शा: वर्णा:
अन्त: स्था: वर्णा:
प्र 6. स्पर्श व्यंजन वर्णों को उनके उच्चारण स्थानों के आधार पर कितने वर्गों में विभाजित किया गया है?
दीपकम् संस्कृत पाठ सूची
Lesson 2 – संयुक्त व्यञ्जनानि Lesson 3 – एषः कः, एषा का, एतत् किम् Lesson 4 – अहं च त्वं च Lesson 5 – संख्यागणना ननु सरला Lesson 6 – अहम् प्रातः उत्तिष्ठामि Lesson 7 – शूराः वयं धीराः वयम् Lesson 8 – सः एव महान् चित्रकारः Lesson 9 – अतिथिदेवो भव Lesson 10 – बुद्धिः सर्वार्थसाधिका Lesson 11 – यः जानाति सः पण्डितः Lesson 12 – त्वम् आपणं गच्छ Lesson 13 – पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि Lesson 14 – आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः Lesson 15 – माधवस्य प्रियम् अङ्गम् Lesson 16 – वृक्षाः सत्पुरुषाः इव
संस्कृत श्लोक सा विद्या या विमुक्तये “वही विद्या श्रेष्ठ है जो मुक्ति दिलाए।” Disclaimer: यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए NCERT की आधिकारिक पुस्तक का अध्ययन करें।
संस्कृत श्लोक सा विद्या या विमुक्तये
“वही विद्या श्रेष्ठ है जो मुक्ति दिलाए।”
Disclaimer: यह सामग्री शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए NCERT की आधिकारिक पुस्तक का अध्ययन करें।
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