माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है लिरिक्स (Maati Ke Putale Tujhe Kitna Guman Hai Lyrics in Hindi)
发布时间:2026-09-12 | 浏览:2
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माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है लिरिक्स (Maati Ke Putale Tujhe Kitna Guman Hai Lyrics in Hindi) -
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है
तेरी औकात क्या तेरी औकात क्या
तेरी क्या शान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
चार दिन की है ये जिंदगानी तेरी
रहने वाली नहीं नौजवानी तेरी
खाक हो जाएगी हर निशानी तेरी
खत्म हो जाएगी ये कहानी तेरी
चार दिन का तेरा मान सम्मान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
राज हस्ती का अबतक ना समझा कोई
है पराया यहाँ पर ना अपना कोई
हश्र तक जीने वाला ना देखा कोई
मोत से आजतक बच ना पाया कोई
कुछ समझता नही कैसा इंसान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
ये जो दुनिया नजर आ रही है हसी
चाट जाये ना इमां को तेरे कही
गोद में तुझको लेलेगी एक दिन जमीं
तुझको ये बात मालूम है के नही
अपने ही घर में तू एक मेहमान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
अपनी करनी की नादाँ सजा पायेगा
वक्त है और ना पास वर्ना पछतायेगा
मौत के वक्त कुछ भी ना काम आएगा
ये खजाना यही तेरा रह जायेगा
माल दौलत का बेकार अरमान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
महकदे खाक है खाक हो जायेगा
तू अँधेरे में एक रोज खो जायेगा
अपनी हस्ती को गम में डुबो जायेगा
कब्र की गोद में जाके सो जायेगा
तू मगर सारी बातो से अनजान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
ग़म के मझधार में एक किनारा बने
या जबीने वफ़ा का सितारा बने
सबका अच्छा बने सबका प्यारा बने
आदमी आदमी का सहारा बने
बस यही आदमियत की पहचान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
चार दिन की कहानी है ये जिंदगी
मौत की नौकरानी है ये जिंदगी
मय्यते जिंदगानी है ये जिंदगी
देख नादान फानी है ये जिंदगी
जिंदगी के लिए क्यों परेशान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
कोई चंगेज खा और ना हिटलर रहा
कोई मुफ़लिस ना कोई तवंगर रहा
कोई बतदर रहा और ना बेहतर रहा
कोई दारा ना कोई सिकंदर रहा
जीते जी सब तेरी आन है शान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
ये कुटुंब ये कबीले ना काम आयँगे
ये तेरे बेटा बेटी ना काम आएंगे
जो भी है तेरे अपने ना काम आएंगे
ये महल और दुमहले ना काम आएंगे
मोह माया में तेरी फसी जान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
इस जमी को कुचलके जो चलता है तू
इस तरह से उछलके जो चलता है तू
यार मेरे मचलके जो चलता है तू
यूँ ततबूर में ढलके जो चलता है तू
मौत को भूल बैठा है नादान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
झूठी अजमत पे इतना अकड़ता है क्यों
माल ओ दौलत पे इतना अकड़ता है क्यों
अच्छी हालत पे इतना अकड़ता है क्यों
अपनी ताकत पे इतना अकड़ता है क्यों
बुलबुले से भी नाजुक तेरी जान है
माटी के पूतले तुझे कितना गुमान है।।
तेरा सबकुछ है बस जिंदगी के लिए
ये जो है जिंदगी की अदा छोड़ दे
क्यों ना केसर बुरा तुझको दुनिया कहे
एक पल की खबर भी नही है तुझे
सौ बरस का मगर घर में सामान है
माटी के पूतले तुझे कितना गुमान है।।
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है
तेरी औकात क्या तेरी औकात क्या
तेरी क्या शान है
माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है।।
*** Singer - Asad Irfan Sabri ***
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सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है लिरिक्स (Maati Ke Putale Tujhe Kitna Guman Hai Lyrics in Hindi) - By Asad Irfan Sabri Nirgun Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।
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